Friday, 10 July 2015

अध्ययन से पूर्व बाईबल को समझना भाग 7

VII  भिन्न  संस्कृति  की पुस्तक
1 पढ़ीये: प्रेरि. 8:27-31 
अ)   वचन को कौन पढ़ रहा था? कूशियों की रानी कन्दाके का मन्त्री और खजांची था
आ) वह कौन से वंश?  कूशि वंश से 
इ)     वह कौन सी पुस्तक पढ़ था? यशायह नबी की पुस्तक
2 क्या खोजा ने परमेश्वर के वचन के सही अर्थ को समझा जिसे वह पढ़ रहा था? नही 
अ)    लूका ऐसा क्या लिखता है जो आपको सोच में डालता है? खोजा ने फिलेप्पुस से कहा; जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं क्योंकर समझूं  दूसरे शब्दों, खोजा को एक शिक्षक चाहिये जो उसे समझा सके।
आ)  क्या खोजा उस भाषा को जानता था जिसमे यशायह नबी की पुस्तक लिखी हुई थी? हॉ
3 पवित्र आत्मा ने किस तरह से खोजा की सहायता की?
अ)   एक व्यक्ति ने उसे समझाया
आ) पवित्र आत्मा ने उसे प्रत्यक्ष समझाया
इ)     उसने एक चकाचौंध करने बाले प्रकाशन को प्राप्त किया
यहां पर दो बाते सीखने को मिलती है (1) यहा पर वचन कुछ ऐसा है जिसे समझना  आवश्यक है (2) सामान्यरूप से पवित्र आत्मा वचन को समझने में हमारी सहायता करता

4 वचन के विभिन्न अर्थ

बाइबल में हमे वचन के विभिन्न अर्थ देखने को मिलते है क्योकि बाइबल विभिन्न संस्कृति से संबंधित है। बाइबल में अनेक ऐसे वचन है जिनका सही अर्थ हम यकायक नही समझ सकते। हालांकि कई बार हमे सोचते है की हम वचन सही अर्थ को जानते है परंतु हमाराऐसा सोचना गलत भी हो सकता है उदा. भजन 141:3

अध्ययन से पूर्व बाईबल को समझना भाग 6

VI वचन के मूल अर्थ खोजना
अब तक हमने सीखा की वचन क्या है, कैसे पढ़ना और आज्ञा पालन करना चाहिये। परंतु ऐसा करने में हमे बहुत ही सतर्क रहना चाहिये क्योकि हमारा आज्ञा पालन शाब्दिक नही परंतु मूल अर्थ जानते हुये होना चाहिये।
1 बाइबल में कई आज्ञायें बहुत ही स्पष्ट है जिनका अर्थ हमे समझने कि आवश्यकता नही परंतु शाब्दिक रूप से उनका आज्ञा पालन किया जाना चाहिये।
उद. के लिये: तू चोरी न करना, तू व्यभिचार न करना, तू हत्या न करना, अपने माता‌‌‌-पिता आदर करना इत्यादि... 
2 परंतु बहुत सी ऐसी आज्ञायें है जिनको हम शाब्दिक रूप से आज्ञा पालन नही कर सकते जैसा बाइबल वर्णन करती है। 
उदाहरण के लिये देखे: मत्ती18:8, लुका14:26 यदि हम इन वचनों उनके अंकित मूल्य मे ग्रहण करते है और कहते की परमेश्वर ने हमको ऐसा ही करने के लिये कहा जैसा लिखा है क्योकि हमे परमेश्वर का वचन  शाब्दिक रूप से ग्रहण करना चाहिये... 
 
आप क्या सोचते है किस तरह से हमे परमेश्वर के वचनों का आज्ञा पालन करना चाहिये?
यह केवल बहुत ही समर्पित मसीही लोगो के संबंध में है

उनके मूल अर्थ को समझे और वर्तमान लागू करे 
जैसा लिखा है बेसा ही आज्ञपालन
आज्ञायों को आऊट औफ डेट जैसा समझे 
 
3 पढ़ीये: मत्ती 5:38-40 और लैव्य.24:19-20 
अ)   यीशु मसीह ने क्या सिखाया? बदला नही लेना 
आ) क्यों फरीसियों ने परमेश्वर के वचन के सही अर्थ को खो दिया? क्योकि उन्होनें वचन के 
मूल अर्थ को समझे बगेर ही शाब्दिक रूप में जैसा है वैसा ही जीवान में अनुसरण किया
4 इसलिये इन शास्त्री फरीसियों ने सोचा बिल्कुल ऐसा करके वे परमेश्वर के वचन का सही सही आज्ञा पालन कर रहे है। 
5 पढ़ीये: लुका 11:42, लेव्य. 27:30 और आमोस 5:24.
अ)   कौन सी आज्ञायें सटीक रूप से फरीसि लोग मानते थे? दशमांस की व्यवास्था (लेव्य. 27:30)
आ) उन्होने कौन सी आज्ञा को पूर्णता: नकार दिया था? ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌न्याय के प्रति परमेश्वर की चिंता  
6  दरअसल फरीसि लोग वचन के कुछ भागो को मानने में असंतुलित थे और कुछ भागो को मानने अनजान
बनते थे 
7 पढ़ीये: मत्ती 22:34-40 

यीशु मसीह ने लोगो को परमेश्वर का वचन समने के लिये कौन सी कुंजी दी, जो वास्तविक अर्थ वचन को देती है?  तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 

अध्ययन से पूर्व बाईबल को समझना भाग 5

V परमेश्वर के वचन का अधिकार
इससे पहले की हम परमेश्वर की प्रतिज्ञायों का अपने ऊपर दावा करे: जब हम सच में परमेश्वर के वचन को मानते और वो सब करते है जो परमेश्वर हमसे करने के लिये कहता; दरअसल हम यह कहते की बिना किसी स्वार्थ के परमेश्वर के वचन का सम्पूण अधीकार हमारे ऊपर है। उदाहरण के लिये कुछ लोग जिन्होंने परमेश्वर के वचन को   
बिना किसी स्वार्थ के सम्पूण रूप से अपने जीवान धारण कर आज्ञायों का पालन किया।  
 
इन दो सूत्रों स्तमाल कीजिए: 
अ)   परमेश्वर ने उन्हें क्या करने के लिया बुलाया था?
आ) किन बातों परमेश्वर उन्हें द्वितीय स्थान में करने के लिये कहा? (आपको अपनी कल्पना-शक्ति का उपयोग करना है)
 
1 पढ़ीये: उत्प.6:13-22 में नूह के विषय
Ø  गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले 
Ø  अपनी ख्याती, दोस्त तथा अपने काम को छोड़ने को कहा 
 
2 पढ़ीये: उत्प.12:1-5 में अब्राम के विषय
Ø  अपने स्वदेश को छोड़कर अनजाने देश को चला जाने को कहा
Ø  अपने दोस्त, रिस्तेदार (परिवारिक सम्बंध), व्यापार और जन्म भूमि को छोड़ने को कहा
 
3 पढ़ीये: उत्प.22:2-5 में अब्राहम के विषय
Ø  अपने एक लौते पुत्र को बलीदान करने को कहा
Ø  अपने एक लौते पुत्र के प्रति मोह छोड़ने के लिये कहा 
5 हमे कैसे पता चलता है की नूह और अब्राहम ने अपने आप को परमेश्वर के वचन के आधीन कर दिया?
इससे पहले उन्होंने किसी परमेश्वर के वायदे का दावा किया वे परमेश्वर के वचन के आज्ञाकारी बने 
 
6 समझाये: 1 कुरिन्थियों 2:13-14 में पौलुसे क्या कहता है?
अ)   पौलुसे किसने शिखाया की उसे किया कहना है?
Ø  पवित्र आत्मा ने 
आ) सर्वोत्तमता से कौन समझ सकता, जो पौलुसे ने लोगो और कलीसिया को शिखाया?
Ø  जिनके पास पवित्र आत्मा है
7 जिनके पास परमेश्वर का आत्मा है वो परनेश्वरकेवचन सही तरीके पढ़ते और समझते है
8 जिनके पास परमेश्वर का आत्मा है वो विश्वास करते हें की परमेश्वर अपने वचनों वचन के द्धारा लोगो से बात करता है
9 इसलिये सही तरीके से वचन को समझने के लिये होना चाहिये:
        Ø  पवित्र आत्मा
    Ø  विश्वास की परमेश्वर अपने वचनों वचन के द्धारा लोगो से बात करता है

10 तीसरा मार्ग परमेश्वर के वचन को समझने के लिये: वचन का सही अध्ययन  करना चाहिये।

इसलिये वचन को समझने के लिये:
Ø  पत्राचार कोर्स करना चाहिये
Ø  प्रतिदिन बाइबल अध्ययन करना चाहिये
Ø  सी आई टी एस में अध्ययन करना चाहिये
Ø  बाइबिल की आज्ञा पालन करने के लिए तैयार रहना चाहिये
 
11 भली भांति बाइबल को समझने के लिये अवस्था बताये जो एक व्यक्ति के पास होनी चाहिये। 
 
अ)   पवित्र आत्मा
आ) विश्वास, की परमेश्वर अपने वचनों वचन के द्धारा लोगो से बात करता है 
इ)    बाइबिल की आज्ञा पालन करने के लिए तैयार रहना चाहिये

अध्ययन से पूर्व बाईबल को समझना भाग 4

IV परमेश्वर के  वचन का पालन
1 पढ़ीये: 2पत.1:1-9 
धार्मिक जीवान (ईश्वरीय स्वभाव) जीने के लिये हमारे ज्ञान को किन किन चीजो की अवश्यक्ता है? उल्लिखित करे।  
विश्वास,  सद्गुण,  समझ, संयम,  धीरज, भक्ति, भाईचारे की प्रीति,  प्रेम।
2 पतरस के अनुसार: वचन से परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने का क्या उद्देश्य है? 
ईश्वरीय स्वभाव के समभागी होना
3 कुछ प्रख्यात बाइबल शिक्षको के साथ यीशु मसीह का अधिकतर बार्तालाव कठोर था। पढ़ीये: यूह.5:39-40 क्यो ये शिक्षक वचन का सही उपयोग करने में असफल रहे?  
 
Ø  उन्होनें वचन का पर्याप्त अध्ययन नही किया था 
Ø  उन्होनें विश्वास नही किया की बाइबल परमेश्वर का वचन है
Ø  उन्होनें परमेश्वर के वचन का पालन नही किया
4  पौलुस के अनुसार 2तीमु.3:16-17 में वचन सीखने का क्या उद्देश्य है?
परमेश्वर का जन सिद्ध बनाने और हर एक भले काम के लिये सुशोभित करने के लिये। 
 

अध्ययन से पूर्व बाईबल को समझना भाग 3

III परमेश्वर का वचन और मनुष्य का वचन 
 
परमेश्वर ने अपने वचनों को भेजने के लिये मनुष्यों के शब्दों का स्तमाल किया परंतु उसने उन्हें अपने शब्दों  को लिखबाने के लिये एक बाबू या टाईपिंग मशीन के समान स्तमाल नही किया। दाऊद ने बुरे वक्त के समय परमेश्वर की सहायता के विषय में कई भजनों को लिखा, पौलुस ने कलीसियाओं की समस्या सम्बंधी पत्रों को लिखा। 
आप क्या सोचते है, किस प्रकार हमें समझना चाहीये, कैसे परमेश्वर इन लोगो को स्तमाल किया? 
अ)   उसने घटनायों को नियंत्रण में लिया जिसके विषय में मनुष्य ने लिखा।  
आ) उसने हरदम अपने संदेशों को शब्द व शब्द लिखवाया।  
इ)     उसने उन्हे अनुभव के द्धारा लिखने के लिये तैयार किया। 
1 परमेश्वर ने कभी-कभी लोगो से कहा है की किया लिखना है।  
पढ़ीये: प्रका.20:5,6
यूहन्ना ने परमेश्वर का संदेश कैसे प्राप्त किया?
परमेश्वर ने यूहन्ना को बताया किया संदेश लिखना है। 
2 परंतु लुका को इस तरह से कोई संदेश प्राप्त नही हुआ, फिर वह किस प्रकार अपने सुसमाचार को लिखता है?
पढ़ीये: लुका 1:1-4 
वह सही सही रूप में जांच करता है और खोज कर के लिखता है की वास्तव में क्या हुआ था यीशु मसीह के साथ। 3 लुका ने उस घटना को लिखा जिसमे परमेश्वर ने यीशु मसीह के जन्म, जीवन और मृत्यु को नियंत्रण में लिया था। पौलुस ने उन घटनायों के बारे में लिखा जिन को मनुष्य नियंत्रण करता है ना की परमेश्वर। उदा. के लिये, कुरिंथ की कलीसिया में विभाजन और व्यभिचार का पाप। परंतु परमेश्वर ने कलीसिया को इस विषय में शिक्षा देने के लिये पौलुस को तैयार किया।
 
निन्मलिखित बिंदूयों में से कौन सा बिंदू पौलुस की तैयारी के लिये स्तमाल हुआ?
अ)   पौलुस यहूदी था और उसे पुराने नियम की व्यवस्ता अच्छी तरह से मालूम थी।
आ) पौलुस पुनर्जीवित यीशु मसीह से मिला था।  
इ)     पौलुस ने अपने  उद्धार के बाद तीन साल  प्राथना और अध्ययन में बिताये थे। 
4 तीन चरणों को लिखे जिनका स्तमाल परमेश्वर अपने वचनों को लिखने के लिये मनुष्य उपयोग करता है। 
Ø  उसने उन्हे लिखने के लिये कहा 
Ø  उसने घटनायों को नियंत्रण में लिया जिसके विषय में मनुष्य ने लिखा।  
Ø  परमेश्वर ने उन्हे उनके अनुभव से लिखने के लिये तैयार किया। 
5 पढ़ीये: गला. 1:1-5 
अ)   यहा पर परमेश्वर के वचन को लिखे
 
 
 
 
 
आ) यहा पर पौलुस के वचनों  को लिखे 
 
 
 
 
इ)     परमेश्वर और पौलुस के वचनों में क्या अंतर है? 
सारे वचन परमेश्वर के है और साथ ही साथ पौलुस के भी    

पुनर्विलोकन
निम्नलिखित को पूरा करे।
अ)   तीन तरह के तरीके बताये जिनके द्धारा व्यक्ति सामन्यता चीजों को समझता है।

Ø  इंद्रियां 
Ø  भावनाये 
Ø  बुद्धि/ मन
  
   ब)  स्पष्ट करे:  कैसे सारे लोग परमेश्वर की सच्चई के विषय जान सकते है?
    Ø  बाइबल पढ़ने के द्धारा लोग परमेश्वर की सच्चई के विषय जान सकते है
   स)  स्पष्ट करे:  कैसे लोग जान सकते है की परमेश्वर अस्तित्व में है? 
   Ø  उसकी सृष्टि को देखने के द्धारा 
 द)  स्पष्ट करे की क्यो परमेश्वर अब सीधे और व्यक्तिगत, लोगो से बात नही और व्यक्ति रूप में हमारे पास नही आता?

Ø  क्योकि उसने अपनी सृष्टि  और प्रकाशन को यीशु मसीह में सम्पूण कर दीया है