VII भिन्न संस्कृति की पुस्तक
1 पढ़ीये: प्रेरि. 8:27-31
अ) वचन को कौन पढ़ रहा था? कूशियों की रानी कन्दाके का मन्त्री और खजांची था
आ) वह कौन से वंश? कूशि वंश से
इ) वह कौन सी पुस्तक पढ़ था? यशायह नबी की पुस्तक
2 क्या खोजा ने परमेश्वर के वचन के
सही अर्थ को समझा जिसे वह पढ़ रहा था? नही
अ) लूका ऐसा क्या
लिखता है जो आपको सोच में डालता है? खोजा ने फिलेप्पुस से कहा; जब तक
कोई मुझे न समझाए तो मैं क्योंकर समझूं दूसरे शब्दों, खोजा को एक शिक्षक चाहिये जो उसे समझा सके।
आ) क्या खोजा उस भाषा को जानता था जिसमे यशायह नबी
की पुस्तक लिखी हुई थी? हॉ
3 पवित्र आत्मा ने किस तरह से खोजा की सहायता की?
अ)
एक व्यक्ति ने उसे समझाया
आ) पवित्र
आत्मा ने उसे प्रत्यक्ष समझाया
इ)
उसने एक चकाचौंध करने बाले प्रकाशन
को प्राप्त किया
यहां पर दो बाते सीखने को मिलती है (1) यहा पर वचन कुछ
ऐसा है जिसे समझना आवश्यक है (2)
सामान्यरूप से पवित्र आत्मा वचन को समझने में हमारी सहायता करता
4 वचन के विभिन्न अर्थ
बाइबल में हमे वचन के विभिन्न अर्थ देखने को मिलते है क्योकि बाइबल विभिन्न संस्कृति से संबंधित है। बाइबल में अनेक ऐसे वचन है जिनका सही अर्थ हम यकायक नही समझ सकते। हालांकि कई बार हमे सोचते है की हम वचन सही अर्थ को जानते है परंतु हमाराऐसा सोचना गलत भी हो सकता है उदा. भजन 141:3।
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